उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु राम का मंदिर अपनी पूर्णता की तरफ है. मंदिर को मजबूती से बनाया जा रहा है. ऐसी तकनीक लगाई जा रही है ताकि अयोध्या का
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु राम का मंदिर अपनी पूर्णता की तरफ है. मंदिर को मजबूती से बनाया जा रहा है. ऐसी तकनीक लगाई जा रही है ताकि अयोध्या का राम मंदिर 1000 वर्षों तक सुरक्षित रहे .शायद यही वजह है कि अब श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दुनिया का पहला ऐसा मंदिर बन रहा है जहां टाइटेनियम जैसी उच्च धातु का प्रयोग किया जा रहा है. अयोध्या का राम मंदिर न केवल आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बनेगा. बल्कि यह आधुनिक तकनीक और सनातन आस्था का भी प्रतीक बनेगा. अयोध्या का राम मंदिर अब दुनिया का पहला ऐसा मंदिर होगा, जिसकी संरचना जिसकी मजबूती के लिए टाइटेनियम जैसी धातु का इस्तेमाल किया जा रहा है. राम मंदिर में टाइटेनियम से बनी 32 जाली लगाई जा रही है.

500 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद प्रभु राम का मंदिर बनकर तैयार हो गया है. अब मंदिर के भूतल प्रथम तल और द्वितीय तल पर टाइटेनियम से निर्मित जाली लगाई जा रही है. टाइटेनियम की आयु लगभग 1000 वर्ष से अधिक बताई जाती है. भारत सरकार की एक संस्था है, जो इन जालियों का निर्माण कर रही है. 15 अगस्त तक राम मंदिर में 32 जाली का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा. दरअसल अयोध्या के राम मंदिर में जितनी भी खिड़कियां लगाई जा रही हैं. उन खिड़कियों में टाइटेनियम की जाली लगाई जा रही है.
टाइटेनियम एक विशेष प्रकार की धातु होती है, जिसका इस्तेमाल पनडुब्बी में किया जाता है. पहली बार देशभर में किसी मंदिर में इस धातु का प्रयोग किया जा रहा है. इस धातु की आयु लगभग 1000 वर्ष से अधिक मानी जाती है और यह धातु वेदर प्रूफ भी मानी जाती है, जिसमें कभी भी जंग नहीं लगता. यह सामान्य धातुओं से सबसे अलग धातु माना जाता है.
भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष निपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर में टाइटेनियम की धातु लगाई जा रही है, जो पूरे देश में पहली बार मंदिर में प्रयोग किया जा रहा है. टाइटेनियम का जीवन 1000 साल से ज्यादा रहता है. यह भारत सरकार की एक संस्था मिधानी है, जिसके द्वारा इस जाली को लगाया जा रहा है. राम मंदिर में लगभग 32 खिड़कियां बनाई जा रही हैं, जिसमें इसका प्रयोग किया जाएगा.
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